Sunday, December 21, 2008


धूम धुप्प धूम धुप्प …
धूम धुप्प धूम धुप्प …
वो देखो
आसमान के सूरज को
धरती पर उतार लिया है
मैनें
और पहिया बनाकर मेरा बेटा
दौड़ाता ले जा रहा है
उसे मेरे खेतों मे
जहाँ मैने सपनों की फसल उगा रखी है
छल छल कल कल छल छल …
छल छल कल कल छल छल …
अरे वो देखो
मेरे साथी की पेशानी से टपका पसीना
अब नदी बन उमड़ा,
चला क्षितिज़ पर सूखते दीखते
समन्दर को भरने उफ़नाने.
मेरी मुसीबतों,
तुम्हारे सदके
तुमने हमें
तुम से जीतना
और
जीना सिखा दिया.